(पति द्वारा पत्नी की अभ्यर्थना)
“हास्य-व्यंग्य”
जब देखो तब व्रत रखती हो, लेकिन पतली हो ना पाईं,
व्रत में ऐसा क्या खाती हो, मोटी ही होती जाती हो।
बात तुम्हारे हित की पूछूँ, शायद कोई मदद कर पाऊँ,
इसीलिए अर्धांगिनी मेरी, मोटापे का राज बता दो।
सुनते ही वो उग्र हो गईं, जली-कटी फिर खूब सुनाई।
पति ने जो पूछा था उनसे, उसकी नहीं हुई सुनवाई।
समझ गए पतिदेव कि अब तो बड़ी मुसीबत आन पड़ी है।
कैसे इसको चुप करवाऊँ, तानों की लग गई झड़ी है।
(पत्नी को शान्त करने के लिए झूठी तारीफ करने लगा और पत्नी की कद-काठी का प्रशंसा के रूप में हूबहू चित्रण कर डाला।)
“हे प्रिय पत्नी! क्षमा करो, मैं ताबेदार तुम्हारा।
तोंद मुझे मत मारो, पिस जाऊँगा मैं बेचारा।
देख तेरा ये रौद्र रूप, प्रिये मुझको चक्कर आते हैं।
रोज रात को सोता हूँ तो स्वप्न भयंकर आते हैं।
मुझे रात को सपने में हथिनी दिखलाई देती है।
अपनी मूसल सी टाँगें मेरे ऊपर रख लेती है।
त्राहि-त्राहि चिल्लाता हूँ, वह हथिनी अद्भुत होती है।
है शरीर हथिनी का सा, पर… शक्ल तुम्हारी होती है।”
(यह बात धीरे से कहता है लेकिन पत्नी सुन लेती है। रौद्र रूप धारण करके कहती है—)
“मैं इतनी सुंदर हूँ, तुम बेडौल मुझे बतलाते हो।
है वज़न सिर्फ साढ़े छह मन, तुम हथिनी मुझको कहते हो।
मेरी शक्ति नहीं जानते, कहते हो यह बात तभी।
एक तोंद की टक्कर दूँगी, तो चूमोगे जमीं अभी।”
पति बेचारा बहुत डर जाता है।
घिघियाते हुए बोलता है—
“प्रिये, न इतना जुल्म करो, तुम वाकई बड़ी हसीं हो।
ढाई मन की लाश सिर्फ, बच्ची हो, ना हथिनी हो।
छोटे-छोटे दाँत, सिर्फ लंबाई फुट भर की है।
टाँगे बड़ी सुडौल, बड़ी सुंदर, गैंडे की सी हैं।
पीकदान सा मुँह है तेरा, शूर्पनखा से नख हैं।
हथिनी की सी चाल तेरी लगती कितनी सुंदर है।
कौवे सी आवाज है तेरी, रंग भैंस का सा है।
ऐसी सुन्दर तोंद कि मानो मटका रखा हुआ है।
कान तेरे हल्दी की गाँठें, आँखें तेरी बटन सी।
नाक तेरी चपटी सी, किसने डंडे से पिचका दी?
फूले-फूले गाल कि जैसे लड्डू रखे हुए हैं।
मुख नक्शे पर खाई, पर्वत, नाले बने हुए हैं।
ककड़ी सी अंगुलियाँ तेरी, और ऊँट सी गर्दन।
पहलवान सी देह तेरी, कर दे न कहीं मम मर्दन।
अब तो खुश हो जाओ तुम, इतनी सुंदर स्तुति की है।
नख से शिख तक तेरे रूप की सुंदर व्याख्या की है।
प्रिये! इतनी स्तुति करने से भगवान पिघल जाता है।
हे पति-मर्दिनी, दासानुदास तेरे ही गुण गाता है।”
-राधा गोयल,
विकासपुरी (दिल्ली)

1 कमेंट
😄
पति बेचारा, बेवजह का मारा।