आज चंदना बहुत खुश थी;;;उसके छोटे बेटे का भी विवाह हो गया हो गया था। बहुत बड़े परिवार की इकलौती संतान;;; उसे लगा वह किसी हद तक अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो गई है।
धीरे-धीरे सारे मेहमान भी जा चुके थे और कुछ दिनों बाद बहू भी अपने पीहर जाकर वापस आ चुकी थी। घर शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था किंतु कुछ दिनों बाद;; छोटी बहू का बिना सोचे समझे सबके सामने बेबाक बोलना अच्छा नहीं लग रहा था;;;और आज तो चंदना की बनाई सब्जी में सबके सामने एकदम से मीनमेख निकालना उसे कुछ अच्छा नहीं लगा। जाकर चुपचाप कमरे में लेट गई।धीरे-धीरे उसका मस्तिष्क पाँच साल पीछे की ओर ले जाने लगा, जब उसके बड़े बेटे की शादी हुई। सुप्रिया नाम के अनुरूप सुंदर, सरल, सहज स्वभाव की;;; किंतु चंदना में उस समय वही सास वाला दम्भ और उसका यही स्वभाव उसे सुप्रिया के लिए पूरे समय कुछ न कुछ तीखा बोलने पर मजबूर कर देता। आज वह सोच रही थी पाँच साल हो गए, उसने कितनी बार बिना गलती के भी उसे डाँटा। कितनी बार स्वास्थ्य खराब होने पर भी लिहाज नहीं किया, लेकिन सुप्रिया मां जी!!! बस बोलकर चुप रह जाती थी। आज चंदना के मन में अपराध बोध उत्पन्न हो रहा था , अपने आप को बहुत ओछा महसूस कर रही थी। सोच रही थी चाहे अनचाहे उसने सुप्रिया के साथ गलत तो किया ही है;;; बस उसने प्रण किया अब मुझे सब ठीक करना है।
चंदना सुबह उठी एक नई सोच, एक नए संकल्प के साथ;;; सुप्रिया को उसके हिस्से का प्यार और छोटी बहू के अनियंत्रित शब्दों पर नियंत्रण;;;;
-साधना छिरोल्या
दमोह (मध्यप्रदेश)
