जब थाम लिया है हाथ तेरा,तो न डर कोई, न कोई परवाह है।अँधेरे में भी दिख रही है मंज़िल,मुश्किल न कोई रास्ता है।
तुम साथ हो तो महफूज़ हूँ,न भटक जाने का संदेह है।तेरे सहारे हर कदम बढ़े,अब हर सफ़र ही साधना है।
-सोनम लड़ीवालाजयपुर (राजस्थान)
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