दरिया की तरह प्यास बुझाना भी तो सीखो।
रिश्तों को निभाने का सलीका भी तो सीखो।।
हर मोड़ पर सफ़र में तुम लेते हो इम्तिहाँ।
करना ज़रा किसी पे भरोसा भी तो सीखो।।
बैठे हो एक आस और उम्मीद लगा कर।
खुद के भरोसे ज़िन्दगी जीना भी तो सीखो।।
यूँ ही तो नहीं आपको मिल जाएगा सब कुछ।
पाना ही चाहते हो तो खोना भी तो सीखो।।
होता है अगर प्यार तो चलता है सभी कुछ।
रूठे हुओं ‘तन्हा’ को मनाना भी तो सीखो।।
-सलीम तन्हा
