सुनो लड़कियों, ज़रा सुनो
सुनो लड़कियों, ज़रा सुनो,
ये वक़्त का सच्चा बयान सुनो।
उड़ना है तो आकाश छुओ,
पर धरती की भी पहचान सुनो।
शिक्षा से ऊँचे शिखर चढ़ो,
पर घर की भी इक शान सुनो।
आज़ादी का अर्थ यही कब
हर बात बने अरमान सुनो।
वस्त्र तुम्हारी इच्छा हों,
पर मर्यादा का मान सुनो।
बोलो खुलकर, लिखो खुलकर,
पर शब्दों की भी आन सुनो।
दौलत के पीछे भागोगी,
तो छूटेगा परिवार सुनो।
ममता के आँचल सूख गए,
तो रोएगा संसार सुनो।
बच्चे केवल जनने से नहीं,
संस्कारों से होते महान सुनो।
घर, दफ्तर, दोनों राहों में,
संतुलन ही है सम्मान सुनो।
बराबरी केवल हक़ में नहीं,
कर्तव्य का भी विधान सुनो।
नारी हो तो शक्ति बनो,
ममता का पावन दान सुनो।
चमक-दमक के इस मेले में,
अपना सच्चा ईमान सुनो।
सुनो लड़कियों, आगे बढ़ो,
पर जड़ों का भी ध्यान सुनो।
-डॉ मधु खंडेलवाल
अजमेर(राजस्थान)
