मुझे पता है
मेरे पंखों में
बहुत दम है
एक दिन जरूर
नापेंगे ये
आकाश सारा
सिर्फ मंजिल पर नहीं
मंजिल से ऊपर
होगा निशाना तुम्हारा।
हौसलों की उड़ान
भरी है तुमने श्रम से
थकना न तुम कभी
देखेगा जौहर
संसार तुम्हारा।
आईने कभी
अपने नहीं होते
पर सपने जरूर
पूरे होते हैं।
रुको मत कभी
आसमान में उड़ते पक्षी
अच्छे लगते हैं
समेटो जब कभी पंख
शीश ऊंचे
अच्छे लगते हैं।
बेटा हो या मेरी बेटी
हंसते हुए ही
अच्छे लगते हैं।।
-संदीप नेमा ‘दीप’
भोपाल
