मेरे पिताजी स्व. श्री बाबुलाल जी अरोरा (इतिहास के व्याख्याता) और मेरी बड़ी बहन स्व. सुश्री शरद अरोरा (स्नातक) साहित्यिक अभिरुचि रखते थे। लेखन उनका शगल...
मेरे पिताजी स्व. श्री बाबुलाल जी अरोरा (इतिहास के व्याख्याता) और मेरी बड़ी बहन स्व. सुश्री शरद अरोरा (स्नातक) साहित्यिक अभिरुचि रखते थे। लेखन उनका शगल...
03/08/1948 को दिल्ली के एक उच्च मध्यम वर्गीय परिवार में जन्म हुआ। हम दिल्ली में कमला नगर में रहते थे। वहीं पर पाँचवी कक्षा तक एमसीडी...
मेरा कहीं भी साहित्य और लेखन से दूर-दूर का वास्ता नहीं था। परन्तु स्कूल में निराला और पंत जी की कविताएं अच्छी लगती थीं। एम.ए. (इतिहास)...
मेरा बचपन किताब, मैगजीन और अखबार के सानिध्य में ही बीता। बड़े हुए तो बच्चों की पत्रिकाएं चंपक, नंदन, लोटपोट पराग पढ़ने लगे।कुछ और बड़े होने...
आज का दिन मेरे जीवन में बहुत ही खास और महत्वपूर्ण है। अपनी साहित्यिक उपलब्धियों में एक और वरदान जुड़ा — मां सरस्वती की कृपा के...
घर के साहित्यिक वातावरण के कारण बचपन मे सबसे पहले लिखा ,सबसे प्रोत्साहन मिलने पर आगे लिखते रहे। बचपन में प्रकृति के प्रति लगाव होने से...
यूँ तो साहित्य से लगाव सबका ही रहा करता है।कोई पढ़कर संतुष्ट होता तो कोई लिखकर।मैं बचपन से ही साहित्य प्रेमी रहा हूँ।मेरे पूज्य पिता उपन्यास...
नमस्कार दोस्तों, मैं सोनम लड़ीवाला, जयपुर, राजस्थान से हूं। मैं अंग्रेजी एम.ए. की छात्रा रही हूं। लिखना न मेरी आदत थी, न शौक था, पर ईश्वर...
मुझे पता हैमेरे पंखों मेंबहुत दम हैएक दिन जरूरनापेंगे येआकाश सारासिर्फ मंजिल पर नहींमंजिल से ऊपरहोगा निशाना तुम्हारा।हौसलों की उड़ानभरी है तुमने श्रम सेथकना न तुम...
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