बाबूजी की छतरीखोई है कहाँ,पता नहीं,खोई तो क्यारख दिया होगा अम्मा नेसहेज करयहीं-कहीं, पता है उसेआज फोल्डिंग छातों के आगे/“बाबूजी की धरोहर” कीक्या बिसात,कौन समझता है/आधुनिक...
बाबूजी की छतरीखोई है कहाँ,पता नहीं,खोई तो क्यारख दिया होगा अम्मा नेसहेज करयहीं-कहीं, पता है उसेआज फोल्डिंग छातों के आगे/“बाबूजी की धरोहर” कीक्या बिसात,कौन समझता है/आधुनिक...
गौरी नेशिव से कहा था – छोड़ो यह अनंत आकाशधरती की ओर देखो। भीख से नहींबीज से भरता है भविष्य। अपने लट्ठ को हल बनाओत्रिशूल को...
आज जब बकरा कटने को आया।पूछा, बताओ, मेरा गुनाह था क्या।आँख उठाकर, मैं नही देख पाया।मैंने तो ताउम्र,बस घास ही खाया। गुनाह था मालिक के लिए...
पास दरिया है , इक किनारा हैदिल हमारा है और तुम्हारा है चाँद ख़ामोश क्यूँ हो बोलो कुछचाँदनी रात का नज़ारा है छत पे आता है...
चल चुके हैंदाँव अपने अँधेरे सबउजालों आ गई अबबारी तुम्हारी धैर्य रखना समय लेनाखेल कीबारीकियों पर ग़ौर करनाहै प्रतिद्वंद्वी बहुत उस्तादउसकीचाल को पूरा समझना समेकित कर...
(दोहावली) (१)नयनों में संकोच है,अधरों पर विस्तार।मन के भीतर खिल रहे,चाहत के कचनार॥(२)दृग-अंचल की पाल पर,सौ-सौ बातें खोल।नयनों ने सब कह दिया,अब क्या बोलें बोल॥(३)चुप्पी भी...
जान जिंदगी से आज खौफ में क्यूँ हैजीवन कठिन सुकूं अब मौत में क्यूँ हैजिसने जन्म दिया उसके तुमने समझे नहीं जज्बातजरा कठिन भी वक्त हुआ,नैनों...
किस तरह गुज़री मेरी मत ज़िंदगानी देखिएआप तो मेरी फ़क़त आँखों का पानी देखिए देखिए मत किस तरह आई पहाड़ों से उतरआप तो बहती नदी की...
फिक्र तो करनी पड़ेगी, पर बेफिक्र होकर,ये शर्त है अब जीवन जीने की।घबराकर नहीं, घुलकर नहीं,सजग होकर, सुलझकर। अपनों की फिक्र करेंगे बेफिक्र होकर,रिश्तों में बोझ...
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