रामजी प्रसाद और उनकी पत्नी अंजना दोनों सरकारी स्कूल में शिक्षक और दोनों ही अलग अलग जिलों में कार्यरत थे।
बेटी शैल इंटर( विज्ञान) कर चुकी थी।
माता पिता को चिंता सता रही थी कि आगे की पढ़ाई के लिए बेटी को कहाँ रखें।
माता पिता जिन जिलों में कार्यरत थे उन जिलों में अच्छे कॉलेज नहीं थे।
साथ में यह भी चिंता थी कि लड़की जात है, अकेली कैसे रहेगी।
लड़कियों के मामले में कोई भी शहर या शहर के होस्टल आदि सुरक्षित नहीं।
मां बाप आखिर क्या करें?
सामने आए इस उलझन से रामजी प्रसाद और अंजना दोनों ही बेटी के भविष्य के लिए चिंतित हो उठे थे।
दो दिन और गुजरे होंगे कि अखबार में शिक्षा विभाग का एक नोटिफिकेशन जारी हुआ।
विभागीय नोटिफिकेशन के अनुसार जो पति पत्नी सरकारी विभाग में कार्यरत हैं उन्हें एक जिला और एक ही ब्लॉक में रखा जाएगा।
प्रक्रिया जारी है।
अगले पंद्रह दिन के अंदर में ऐसे कर्मचारियों के सामंजन का पुनः नोटिफिकेशन निकला।
रामजी प्रसाद और अंजना दोनों एक ही जिले में एक ब्लॉक के अन्तर्गत आ गए।
बेटी की आगे की पढ़ाई को लेकर जो उलझनें थीं वो समाप्त हो गईं।।
-अजय पाण्डेय बेबस
