हमारी खुशियों को बेकार करता कौन है।
हमारे दुश्मन से मिल रार करता कौन है।?
हमारी तो खूबसूरत रही है जिन्दगी।
जहाँ में फिर तीर तलवार करता कौन है??
रहें मिलकर, ये हमारे जमाने की बंदगी।
मगर अपनों, दुश्मनी, यार करता कौन है??
बहुत आगे हो चली आज की दुनिया जहाँ?
वहाँ अपना वक्त बेकार करता कौन है??
जहाँ भी हम देखते हैं वही लफड़ा बहुत।
मक्कारों का आखिर सत्कार करता कौन है??
-अजय पाण्डेय बेबस
