बात 1980 की है। हम छोटे से शहर इलाहाबाद में रहते थे। उस समय इलाहाबाद अपने, विश्व विद्यालय, हाई कोर्ट, राजनीतिक गतिविधियों , साहित्यकारों, माघ मेले,...
बात 1980 की है। हम छोटे से शहर इलाहाबाद में रहते थे। उस समय इलाहाबाद अपने, विश्व विद्यालय, हाई कोर्ट, राजनीतिक गतिविधियों , साहित्यकारों, माघ मेले,...
हैं अभी संभावनाएँ और जीवन ढल रहाइस हृदय का क्या करें जो मोतियों-सा पल रहा है अभी हाथों में कुछ तो जो अधूरा है अभीहम प्रयासों...

शहर से लौटकर, जब गाँव की तरफ आया, तो भीतर वही बचपन की स्मृतियों ने कल्पना के गोतों में कहीं खो-सा दिया था। एकाएक, संकरी गलियों...
तुम्हारे मीठे मधुर,शब्दों की बरसात।मैं भीगी थी उस रात। दोनों के अल्फाज।एक दूजे की आवाज।गूंजती रही दूर-दूर तक अंदर। धीरे-धीरे खामोशी का समंदर।बढ़ता गया।अल्फाज चुप हो...
ये कैसी बेचैनी मुझमेंकोई इसको समझ न पायेखुद से खुद को लड़ना हैहम इसको पहचान न पाये— याद किसी की जब आती हैउसका साया मुझको डसतायादों...
(व्यथा) खुले कैदखाने में,दीवारें न थीं कॉन्क्रीट की।न थीं पैरों में बेड़ियाँ,न ज़रूरत थी चौकीदार की। दिल हाइजेक था,दिमागों पर लगी थी बेड़ियां।नशे में धुत्त सभी,अहसास...
जिक्र तेरा सनम… हर लफ्ज में करेंगे हमबेफिक्र रहना तू… तेरा नाम नहीं लेंगे हम देख तुझे दूर से ही तन्हा…जी लेंगे हमतेरी खामोशी का सनम...
खुद के अस्तित्व की तलाश मेंढूँढती हूँ खुद कोकभी दूसरों की इजाजत मेंकभी घर की इबादत मेंकभी धूप में, कभी छाँव मेंढूँढती हूँ, घर के हर...
मेरे दिल के भाव जब,शब्दों का रूप ले लेते हैं….तब मेरे जज़्बात सिर्फमेरे ही नहीं रह जातेजाने और कितनों के हो जाते हैं। मेरे पन्नों से...
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