है रफ्तार कम तो क्या हुआ,जिन्दगी हुई,थोड़ी बेहाल तो फिर क्या हुआ,बिगड़ गए हैं जो हालात,तो फिर क्या हुआ,ज़रा से खौफनाक हुए हैं मंज़र,तो क्या हुआ,मौकापरस्त...
है रफ्तार कम तो क्या हुआ,जिन्दगी हुई,थोड़ी बेहाल तो फिर क्या हुआ,बिगड़ गए हैं जो हालात,तो फिर क्या हुआ,ज़रा से खौफनाक हुए हैं मंज़र,तो क्या हुआ,मौकापरस्त...
पंक्ति पर काव्य रचना मंजिल दूर मुश्किल ही सहीराह भी पथरीलें ऊंचे नीचे सहीकदम भी थके -थके चूर सहीहौसला रख मुश्किलों कोमुस्कुराकर आसान कर देगें ||...
बचपन गाँव में बीता। आँखें या तो खेतों की सूखी काली मिट्टी देखती थीं या आसमान में उड़ते सफेद बादल।ज़िन्दगी भी तब श्वेत-श्याम थी। सपने रंगीन...
ज़िंदगी, ज़िंदगी, ज़िंदगी;ज़िंदगी, ज़िंदगी, ज़िंदगी, कुछ ख़्वाहिश है मेरी..ज़िंदगी, ज़िंदगी, ज़िंदगी,कुछ ख़्वाहिश है मेरी…. एक दिन तो तू भी ना रहेगी; एक दिन मैं ना रहूँगा…तुम...
कभी द्वार खटखटाने की आवश्यकता न थी। आत्मीयता इतनी प्रगाढ़ थी कि पगध्वनि सुनते ही मन के कपाट स्वयं खुल जाते थे। माँ का वात्सल्य यूँ...
कजरारे नयनों ने मस्ती भरसुर्ख अधरों से कुछ कहा हैझूमते कुंडलों ने सुना है प्रेमगालों की लाली शर्मा रही है। मुस्कुराहट तेरी जता रही हैबातें थी...
रूहानी तौर पर ही सही,प्यार को पाया तो है।ख्यालों में ही सही,इस जिंदगी को जीया तो है। जो जज़्बात इस दिल में है,वही धड़कन उधर भी...
गम हो या खुशी, हम तुम्हारे साथ है।न समझो मजबूरी, भले साथ छोड़ दो। रुख निगाहों का भले ही मोड़ दो।बिन जाने ही दिल मेरा तोड़...
आज #world_menstruation_day पर खास #worldmenstruationday #मासिकधर्म #पीरियड महिलाओं की एक कुदरती, सामान्य औऱ नियमित शारीरिक प्रक्रिया है मासिक रक्तस्त्राव, जिसे हिंदी में मासिक धर्म, माहवारी, रजस्वला...
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