कुछ दिन रहना चाह रहा हूँजाकर निर्जन वन में। लाभ-हानि का गणित भुला दूँअपने सुख-दुख भूलूँअंतर्मन की नीरवता केउच्च शिखर को छू लूँ।एक लहर-सी मचल रही...
कुछ दिन रहना चाह रहा हूँजाकर निर्जन वन में। लाभ-हानि का गणित भुला दूँअपने सुख-दुख भूलूँअंतर्मन की नीरवता केउच्च शिखर को छू लूँ।एक लहर-सी मचल रही...
नन्हें नन्हें कोमल मृदुल पाँव सेलौटा मेरा बचपन नन्हें गाँव से । मन अब भी अटका पर मेरानदी नाव की माया में ।सती मात के टीले...
हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी हैं जो केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बनतीं, बल्कि जीवन-दर्शन का पाठ भी पढ़ाती हैं। वर्ष 1971 में...
जब एक लड़कीअपना आँगन, अपना बचपन,माँ की ममता और पिता का साया छोड़करकिसी अनजान घर की दहलीज़ पर कदम रखती है,तब उसे केवल एक रिश्ता नहीं,एक...
फुसफुसाहट होने लगी थी हवाओं में।अनजाने भय ने थाम लिया राहों को।मौसम संगीन था अंधेरा गहराने लगा।घिर आए बादल धूल का गुबार न था। आँधी तो...
मुश्किलों को मुस्कुराकर आसान कर दें ,खाली से जीवन के कैनवस को रंगों से भर दें ।जिंदगी है तो मुश्किल वक्त भी आयेगा ,हंसकर चलते चलो...
पगपग दलदलमन में उलझनकमर बनी कमानवे रोपते धान। रंग बिरंगी पन्नी ओढ़ेआते है सब दौड़े-दौड़ेबस मेहनत ही भगवानवे रोपते धान !! बिच्छू सांप है संगी-साथीन वृष्टि...
आज साहित्य और ग़ज़ल की दुनिया का एक संवेदनशील स्वर मौन हो गया।बशीर बद्र केवल एक शायर नहीं थे, वे टूटते रिश्तों, बिखरती संवेदनाओं और इंसानी...
ज़िंदगी का सफ़र यूँ ही कट जाएगा,न कुछ साथ आया है न कुछ साथ जाएगा,कर्म ग़र अच्छे किए थोड़े यादों में रह जाएँगे,मर कर भी अपने...
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