झर-झर झरती अनंत धारा, ओ जीवन! ओ चिर-अपरिचिता!किस अदृश्य सागर की प्यास लिए बहती जाती हो निस्सीमता? कितनी बार पुकारा मैंने, निशा के पावन आलोक आकाश...
गिला होता ज़माने से मगर इतना नहीं होता,मेरा ईमान से रिश्ता अगर गहरा नहीं होता। भले ही कोयले की खान का पत्थर है हीरा भी,मगर हर...
माँ वाग्देवी की असीम कृपा से ही सकारात्मक साहित्यिक सफर प्रारंभ हुआ। शिक्षा-शिक्षक-शिक्षार्थी बन बनारस शहर से ये सफर शुरु हुआ और बाबा विश्वनाथ की महिमा...
कोई नहीं है अपना !शाम ढली तो पाया खुद को निपट अकेला,जगा रात भर,बदली करवट,हुई सुबह की बेला।छूट गए सब लक्ष्य अधूरे, बीते कितने मौसम,टूटी आशा,बिखरे...
मैं कम में जीता हूँकम शब्दों में,कम लोगों में,कम इच्छाओं में। भीड़ से भरे इस संसार मेंमैंने अपने भीतरएक शांत कोना बचा रखा है,जहाँ दिखावे की...
धूल झोंक कर आँख में, छीन लिया सम्मान!महिमामंडित कर चले, एक-दूजे को श्वान!! खून पसीना एक कर, जोते खेत किसान!तब धरती माँ दे रही, झोली भर-भर...
बात सिर्फ़ महिला वर्ग की नहीं,बात उस सत्य के भय की हैजो एक स्त्री के साथउसके जन्म से चलना शुरू कर देता है।उस भय काकोई धर्म...
मिले अगर सम्मान तुम्हें तो,भर ह्रदय स्वीकार करो।स्नेह, दुलार और ममता का,आदर व सत्कार करो। खुश रहो जीवन में औरों से,सदा सद् व्यवहार करो।मिले अगर जो...
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