“स्वानुभूती” जो स्वानुभूत है अंतर में, वही वाणी मुखरित हो,अनुकरण के आवरण से काव्य कभी न विकसित हो।अंतरा परिवार बना प्रेरणा का अक्षय स्रोत हम सबका,अंकुरित...
जिन्दगी के सफर की हालत,अब सायकिल सी हो गयी है,यह सफर,जब शुरू हुआ था,सूरत पे रंगत थी।अधर मुस्कराते थे,आंखों में चमक थी,पूरी रौशनी थी।बोली में उत्साह...
आज एक जिन्न से मुलाकात हुईपहले मैं कुछ डरी सहमीफिर थोड़ी-थोड़ी बात हुईजिन्न खुश हुआ औरमुझे एक करामाती बायोस्कोप दे गयाउससे खुद के अंदर देखातो पूरा...
जब ग़ज़ल ईमान भी खोने लगेये कविता आन भी खोने लगेतब चले आना लिए कुछ चुटकुलेंमंच अपनी शान भी खोने लगे खामुशी है तालियों की बात...
तेरी बज़्म से लौट नाशाद आएनया फिर से ग़म करके ईजाद आए पहुँच तो गया था मैं मंज़िल पे लेकिनसफर के वो रास्ते बहुत याद आए...
रामजी प्रसाद और उनकी पत्नी अंजना दोनों सरकारी स्कूल में शिक्षक और दोनों ही अलग अलग जिलों में कार्यरत थे।बेटी शैल इंटर( विज्ञान) कर चुकी थी।माता...
कहाँ खोई हुई हो बड़ी गम्भीर भी लग रही हो क्या बात है? श्यामा की आवाज ने सुरभी को झकझोर दिया।अहं कुछ नहीं बहन।कुछ तो है...
Copyright © 2026 Antra Shabd Shakti. All Rights Reserved. Powered by WebCoodee