आज हम ऐसे समय में सांस ले रहे हैं जहां नैसर्गिकता का स्थान कृत्रिमता ने ले लिया है, चाहे वह वातावरण की हो, खान-पान की हो...
आज हम ऐसे समय में सांस ले रहे हैं जहां नैसर्गिकता का स्थान कृत्रिमता ने ले लिया है, चाहे वह वातावरण की हो, खान-पान की हो...
किसी वृद्ध ने बहुत ही सुंदर बात कही है,आज की पीढ़ी इकठ्ठा करने के लिए जी रही है,और हमारी पीढ़ी इकठ्ठा रहने के लिए जीती रही।जब...
मानव सभ्यता का सबसे पुरातन धर्म करुणा है। पर आज करुणा के स्वर धीमे पड़ गए हैं। महानगर की भीड़ में मनुष्य, मनुष्य को देखकर भी...
कल शाम की ही बात है। बाहर, बीच सड़क पर एक मोटरसाइकिल सवार युवक फिसलकर गिर पड़ा। वह दर्द से कराह रहा था, लेकिन व्यस्त सड़क...
आखिर हो क्या गया है हमारे समाज को? आज चारों ओर से आत्महत्या, अवसाद और निराशा की खबरें सुनने को मिल रही हैं। क्या सचमुच जिंदगी...
गणतंत्र दिवस की परेड टी.वी. पर देख रही थी तो उत्साह, उमंग, रोमांच और गर्व-बोध की भावनाएँ एक साथ उमड़ पड़ीं। कभी आँखें भींगी, तो कभी...
देशप्रेम और मनोदशा अभी उड़ा स्टेडियम, देखो बेटा पाक।जल्द देखते देखते, हो जाओगे खाक।। आई देखो पाक की, शामत आज बतौर।रावलपिंडी लाल है, काँप रहा लाहौर।।...
मैं मजबूत वृक्ष बरसों से खड़ा।कितने आँधी-तूफानों से लड़ा। सहनशीलता से सामना किया,धराशाई करने का था दाँव बड़ा। हमारे साथियों का कर सफाया,लोभ से धरती को...
आइना अगर सच बोलता है, तो वो सच तुमको सुनाई क्यों नहीं दिया,यहाँ कितने दिल बेज़ार हैं, तुम्हें उनका दुःख दिखाई क्यों नहीं दिया? तुम समेटते...
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