कभी तो मिलो ना साजनकहीं भी…..झील के किनारेशिशिर के तरंगी मौसम में….भरी दोपहरीफागुन की ठंडी बयार में…..गुलमोहर से महकती फिज़ाओं मेंरंगों के त्यौहार परहोली के दिन….....
कभी तो मिलो ना साजनकहीं भी…..झील के किनारेशिशिर के तरंगी मौसम में….भरी दोपहरीफागुन की ठंडी बयार में…..गुलमोहर से महकती फिज़ाओं मेंरंगों के त्यौहार परहोली के दिन….....
किसने चाही ज़िम्मेदारी,चाही सबने हिस्सेदारी। लेन-देन पर टिकी हुई है,दुनिया सारी है व्यापारी। सींच रही हूँ अब तक मन में,उसकी यादों की फुलवारी। क्यों मैं शर्ते...
आधार, विधाता छंद1222,1222,1222,1222 मिला जो और भी मिलता, ससुर बारीक ना होता।खुशी मिलती कहाॅं ऐसी,खुदा तौफीक ना होता। सड़क पर माल जूतों की उसे पहनाइ ना...
ख्वाब आँखों में टिकता नहीं है |वो जमीं पर उतरता नहीं है || दिल हमारा हुआ सख्त कितना |फूल जीवन में खिलता नहीं है || साथ...
वो चंद बरसों का साथ अपनाबड़ा ही गहरा वो एक सपनाभले वो अपने मकां में रहतीभले मैं अपने जहाँ में रहतामगर वो हर पल करीब मेरेलहू...
शर्त इतनी-सी है ख़ुशी के लिए,दिल न खोला करो सभी के लिए। वो जो रिश्तों में धूप बोते थे,घर बचाते फिरे नमी के लिए। जिस्म मिट्टी...
कब मिले बिछड़े, हमें कुछ याद आता ही नहींअब गिला भी क्या करें, जब कोई नाता ही नहीं पत्थरों के घर में रहकर लोग पत्थर हो...
लाल सुर्ख जोड़ेमें लिपटकर ,ससुराल की देहलीसे जो मिलने आई। न जाने कितनेरिश्तों को छोड़ा,कितनो को सजोने आई। माँ ने बिदाई की तू पराई है,सासू ने...
मिसरों में ये जो लफ़्ज़ों के अंदर की बात हैआम आदमी की सोच से ऊपर की बात है इक घर में रह के भी नहीं आपस...
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