तुम्हारी ग़ज़लें हँसा रही हैं, तुम्हारी ग़ज़लें रुला रही हैंज़माने से जो छिपानी थीं वो, तमाम बातें बता रही हैं हमें समझ में नहीं हैं आतीं,...
तुम्हारी ग़ज़लें हँसा रही हैं, तुम्हारी ग़ज़लें रुला रही हैंज़माने से जो छिपानी थीं वो, तमाम बातें बता रही हैं हमें समझ में नहीं हैं आतीं,...
“माँ, तुम कहाँ हो?” सपने के बाद सुनयना नींद से हड़बड़ा उठी.“मैं तुम्हारे पास ही तो हूँ!” माँ ने कहा.“पर मुझे तो दिखाई नहीं दे रहीं!”...
सूख जाए जब सुख की डालीछलक उठे जब दुःख की प्याली बुझी बुझी सी हो सारी बातेंकटे न जब अंँधियारी रातें जब कांँटे भरे हो दामन...
रिश्तों की चतुराई से डर जाता हूँभाई हो कर भाई से डर जाता हूँ जाने कैसा-कैसा सच दिखलाती हैआँखों की बीनाई से डर जाता हूँ ऊपर...
“हल्की सी बारिश की फुहारे, हल्की सी है धूप,उस पर निखरता बदली जैसा उजला सुंदर रूप। गाल गुलाबी, हया के मारे जैसे कमल खिला हो खूब,तीखी...
मैंने ,एक मज़बूत पेड़ सेबाँध दिए हैं अपनेसारे दुख …. और सींचती हूँहर रोज़ उसे … जानती हूँ किपेड़ रहेगा जब तकहरा-भरा ……. मेरे दुखों के...
नींद में जब कभी मुस्कुराने लगे।और ख्वाबों में आकर सताने लगे। मज़लिसों में हमें वो भुलाने लगे।हम ग़ज़ल चाहतों की सुनाने लगे।। यूं तो कोई नहीं...
रोज हत्याएँ, फिर भी सब मौन हैं।बेवजह हत्याएँ करे कौन है।01। आदमी भी हैवान हुआ चल रहा।डर जगाकर खुशियाँ लुटा चल रहा।02। लोग अपनों से दूर...
वे बच्चेजो खेतों की मेड़ों पर बैठकरभूगोल नहीं,भविष्य पढ़ते हैं…जो लालटेन की लौ मेंरसायन के सूत्र घोलते हैं,जो भूख को पानी से भरकरनींद को किताबों में...
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