मैं मेहनतकश मजदूर हूं,आज हुआ लाचार,कोरोना की महामारी ने,छीना है रोजगार।। रे! मानव;;;मानवता को आज तू,कर रहा शर्मसार,एक रोटी देकर के,फोटो खिंचाये हजार।। -साधना छिरोल्यादमोह (मध्य...
मैं मेहनतकश मजदूर हूं,आज हुआ लाचार,कोरोना की महामारी ने,छीना है रोजगार।। रे! मानव;;;मानवता को आज तू,कर रहा शर्मसार,एक रोटी देकर के,फोटो खिंचाये हजार।। -साधना छिरोल्यादमोह (मध्य...
मजदूर दिवस पर अतुकांत रचना ये हाथ हैंजो सुबह से पहले जागते हैं।धूप से पहले पसीना जानते हैं,और छाले गिनते गिनतेरोटी का हिसाब लगाते हैं। इन...
सूरज देता तेज और उल्लासबढ़ता शक्ति का संचार। प्रकृति में संवर्धन होता जब,लय प्रवाह गति होती अपार। हरियाली बढ़ती धरा पर,खुशी संग समृद्धि की बहार। जन...
(मनहरण घनाक्षरी काव्य) देश फिर ना बिखरें,देखो लहू के कतरे।जश्ने आजादी हमारी,भूल न जाना कभी। छोड़ो धर्मों की लड़ाई,रूत बहारों की आई।लहरा उठा तिरंगा,भूल न जाना...
धर कोख में जो,नवजीवन देती हैवह मां होती है ! आंचल अमृत सिंचन करक्षुधा को हर लेती हैवह मां होती है! संतान की खातिरकाल से भिड़...
अग्निबाण सेबेध रहे होतुम नाजुक फूलों कोसहमी सहमी नदीसिमट करछोड़ रही कूलों को उलटी पड़ी नावभूल करलहरों वाले राग हुई धराशायीवह हिरणीकबसे भाग रही थीनीर भरे...
माता-पिता बेशक बूढ़े हो जाएँ पर वे घर के लिए एक छतनार वृक्ष की तरह होते हैं। वे घर में रहते हुए चाहे शारीरिक कार्य पूर्ववत...
हमारी खुशियों को बेकार करता कौन है।हमारे दुश्मन से मिल रार करता कौन है।? हमारी तो खूबसूरत रही है जिन्दगी।जहाँ में फिर तीर तलवार करता कौन...
बिखरे हुए रंग धरती परआधे और अधूरे कल के अहंकार ऊँची चोटी परबना रहा हैअपने अड्डेसोचे बिना खोद दी सड़केंदीख रहे हैंअनगिन खड्डेउंगली उठा रही हैं...
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