आत्ममुग्ध युग की कबीर व्याख्याकबीरदास ने बड़ी सादगी से कहा था —“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न...
आत्ममुग्ध युग की कबीर व्याख्याकबीरदास ने बड़ी सादगी से कहा था —“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न...
देह के गीत गाते रहे उम्र भर,मन सहज सब व्यथा पीरसहता रहा। बालपन सुख, जवानी रहीं उलझने,अंत में तन व्यथा सह रहा हार की।क्या कहूँ आदि...
बेटी को अपनी यारों रानी बना दो तुमतूफान से टकराए मर्दानी बना दो तुमनारी है रूप शक्ति का अबला नहीं है वोजीतेगी हर जंग को तूफानी...
ख्वाब मेरे नाजुक सेसुबह की धूप सेकभी ढलती शाम सेकभी कभी तपती रेत सेहर बार ना जाने क्योंकिरिच किरिच हो जातेमैं टुकड़ा टुकड़ा ख्वाब काबटोर कर...
मित्र हमारे लिए , हमारा जीवन है ।मित्र ही , हमारे प्राणों का मधुवन है।। आती जाती साँस , राधिका -गोपी हैं।मित्र कृष्णमय , ओतप्रोत वृंदावन...
जीना – मरना ही है जीवन का नाम,जिंदा हो जब तक तो यही रखता है तुम्हारा काम,जब तक सांस है तो सोचते हो लाभ और हानि,दो...
तुमकोअपना मानदिल दे दियासंग चलनापिया पियासंग चलीहाथो में हाथजीना मरनासाथ ऐसाअमर प्रेमदेता ये संदेशप्रीत करोसच्ची कहानीतेरी मेरीअमर हो गईसोच सोचमुस्काई -स्मृति गुप्ताजबलपुर
दर्द दिल का लिखूँ,दर्द अपनों ने जो दिया वो लिखूँ,दर्द जमाने ने भी कम न दिए,दर्द किस किस का लिखूँ! दिल तन्हा है,दिल को इंतज़ार है...
किताबें ही हमें अन्याय से लड़ना सिखाती हैं.घिरे हों जब अकेले हम,कभी दुनियां के मेले में,किताबें मित्र बन, विश्वास दे, अपना बनाती हैं,किताबें लेखनी के मर्म...
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