(मनहरण घनाक्षरी काव्य) टूटा हमारा घोंसला,वादा क्रांति का खोखला।कौन सूने कैफियत,बेजुबानों की यहां। खिली हुई हरियाली,कुल्हाड़ी उसी पे चलीं।कौन सूने शिकायत,बेजुबानों की यहां। उड़ गए पंछी...
(मनहरण घनाक्षरी काव्य) टूटा हमारा घोंसला,वादा क्रांति का खोखला।कौन सूने कैफियत,बेजुबानों की यहां। खिली हुई हरियाली,कुल्हाड़ी उसी पे चलीं।कौन सूने शिकायत,बेजुबानों की यहां। उड़ गए पंछी...
धूप सुनहरी माँग रहा हैरामभरोसे आज नदी चढ़ी है, सागर गहरापार उसे ही करनासोच रहा वह नैया छोटीऔर धार पर तिरना छोटे-छोटे चप्पू मेरेसाहस-धीरज-लाज खून-पसीना बो-बोकर...
स्नेह नहीं अब सम्बन्धों में,मतलब बिना कोई न यार।यन्त्र-तन्त्र-संयन्त्र दिलों में,मरी भावना, न कोई प्यार॥ जीव जो मेरे काम के नहीं,छिड़क रसायन मार रहे हैं।ईश्वर-निर्मित सृष्टि-जगत...
लगे सजाने वर्तमान कोलेकर फिरकीचड़ अतीत कीलेकिन जहाँ-जहाँ जायेंगेसंवेदन ही आहत होगा ! कहीं-कहींलथपथ पायेंगेसनी खून से हुई चेतनाकहीं क्रूरता केप्रकोप मेंमिले चीखती हुई वेदना उत्पीड़न...
खुद के पैसे से ख़ुद को सजाने लगे हैं लोग,आईनों को भी अब आज़माने लगे हैं लोग। चेहरे पे चेहरा रख के निकलते हैं इस तरह,सच्चाई...
शब्द युग्म – “इधर-उधर” बात को इधर-उधर करना नहीं अच्छा,ये पाप अपने हिस्से, भरना नहीं अच्छा। यहाँ बोलने वाले बोलते रहेंगे उम्र भर,इन बोलने वालों से...
शब्द युग्म -“इधर-उधर” इधर उधर की बातें छोड़ोआओ काम की बात करेंतम्बाकू और धूम्रपान हैं घातकजम कर खूब प्रचार करें । कच्ची पक्की शराब हो यागांजा...
शब्द युग्म-“इधर-उधर” जब भी मन होता है इधर- उधर,किताबें साथ निभाती हैं। मन मस्तिष्क से हृदय पटल तक,सबको ही संभालती हैं। कल आज और बीते कल...
शब्द युग्म – “इधर-उधर” एक बार मै आकाश में ऊंची उड़ान भर रहा था ।जंगल, पहाड़ों, बस्ती के ऊपर से गुज़र रहा था। गर्मी का मौसम...
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