एक दिन संध्या के समय सरयू के तट पर तीनों भाइयों संग टहलते श्रीराम से भरत ने कहा, “एक बात पूछूं भईया?माता कैकई ने आपको वनवास...
वो भी क्या दिन थे,जब सखी सहेली हमदम थे। प्यारी सहेलियों के संग, कहकहे लगाया करते थे,किसी बात की चिंता नहीं बेफिक्र होकर रहते थे,आया सावन...
सब मेरे अपने ही तो हैं क्या हुआ अगर कभी किसी बात को लेकर कुछ कह दिया तो, हमारे हैं इसीलिए तो कहा वरना बाहर वाले...
‘अपराधबोध’ …..रोज की तूतू मैंमैं से तंग आकर राजेश बड़े भारी मन से अपनी माँ को वृद्धाआश्रम छोड़ आया। उसके आठ साल के बेटे ने अपनी...
आज चंदना बहुत खुश थी;;;उसके छोटे बेटे का भी विवाह हो गया हो गया था। बहुत बड़े परिवार की इकलौती संतान;;; उसे लगा वह किसी हद...
“१६- ११ मात्रा” कल की चिंता छोड़ो बंदे, कल का कौन सहाय।वर्तमान ही तेरा सब कुछ, जीवन सार उपाय।।जीना जी बेफिक्र हमेशा,मौला मस्त कबीर।भूत- भविष्य पूर्व...
पंक्ति पर काव्य रचना पत्थर चुभते पांव में कसक हर बार नहीं होती|चीटीं चलती पहाड़ में गिरती परहार नहीं होती|कोशिश करने वालों की हार नहीं होती|सूखे...
कभी किसी का कंधे पर रखा हाथ,जमाने भर का दर्द पिघला देता है,अनायास गले लगाना किसी का सदियों से जमी बर्फ की दीवारें ढा देता है,जरूरी...
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