जब-जब दुनिया ने कहा –‘लड़की है…इतना क्या उड़ना?’तब-तब मेरी माँ नेमेरे कंधों परअपने विश्वास के पंख रख दिए…उस दौर में,जब बेटियों के सपनों परघर की चौखटें...
जब-जब दुनिया ने कहा –‘लड़की है…इतना क्या उड़ना?’तब-तब मेरी माँ नेमेरे कंधों परअपने विश्वास के पंख रख दिए…उस दौर में,जब बेटियों के सपनों परघर की चौखटें...
यह जीवन हैबहुत नटखट है एक पल में हंसातातो दूजे पल रुलाताकभी जीवन की छांवतो कभी धूप दिखाता यह जीवन हैबहुत नटखट है कभी चुपके से...
बहुत ज़रूरी खाली बर्तन दिखना भरा-भरा साऊपर तक जो भरा पर वो छलके ज़रा-ज़रा सा मन भर कैसे जिएगा ये मन ,मन से मन ये पूछेरहे...
यह नदीपग-पग महावर रच रही हैइस नदी में पाँव क्या तुमने बढ़ाये? जन्म-जन्मों से तृषित हर याचना कोपूर्ण तट की कामनाओं ने किया हैकौन-सा उत्सव जगा...
जो न हो काली घटा तो,पानी कभी न बरसे |तब नादान मानव तू समझ ले,अन्न एक न उपजे | जो न हो नारी धरा पर,वंश बेल...
ठहरे-ठहरे जी ऊब रहामन कहता है कुछ और करूँ पंछी बन नापूँ आसमानसूरज की किरणों पर झूलूँहरियाला सावन ओढ़ हँसूंरिमझिम स्वर में सब कुछ भूलूँ तालों...
ममता करुणादया प्रेम कोत्याग समर्पणकुशल क्षेम कोजिसकी हरदम हां हैधरा गगन मेंसकल भुवन मेंमां सा कोईकहां चमन मेंमां सी तो बस मां है !!! मां है...
वो बातें जो मुक़द्दर का नाम ले कह दी हैं मैंने,आज शब्दों में तराश, कागज़ पे रख दी हैं मैंने। आँधियों में छप्पर सा वजूद उड़...
एक बार एक अठारह वर्ष के बच्चे का बाइक चलाते हुए एक्सीडेंट हो गया । सड़क पर बेहोश पड़ा था, लोग देख देखकर जा रहे थे...
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