प्रकृति में लेना और देना साथ चलता है। हम सांस लेते हैं और वापस छोडते है। छोड़ी हुई सांस को पेड़ पौधे ग्रहण करते हैं। और...
प्रकृति में लेना और देना साथ चलता है। हम सांस लेते हैं और वापस छोडते है। छोड़ी हुई सांस को पेड़ पौधे ग्रहण करते हैं। और...
हम जीवन को किस प्रकार देखते हैं,जन्म हुआ, बचपन आया,जवानी आई ,पढ़ाई लिखाई फिर बारी कमाई की आई,पैरों पर खड़े हो गए, कर ली सगाई, शादी...
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मेलजोल के लिए समय नहीं है | समय पति पत्नि बच्चें सभी पढ़ाई व नौकरी के चलते समय का अभाव...
भाव पल्लवन यह पंक्ति हमें जीवन के असली अर्थ से परिचित कराती है। इसका भाव है कि मनुष्य का जीवन केवल अपने स्वार्थ, अपनी सुख-सुविधा और...
बारिश की एक बूंद छत की मुंडेर पर अटकी थी। घंटों वहीं ठहरी रही। खुद को बचाती रही – “मैं गिरूंगी तो मिट जाऊँगी।” फिर एक...
आज का विषय बहुत ही सुंदर अपने लिए जिए तो क्या जिए ;;;जो कहीं ना कहीं हमें जीवन जीने की कला भी सिखाता है। हमारे पूर्वज...
वर्तमान परिपेक्ष्य में देखा जाए तो आम आदमी भी धनवान बनने के लिए किसी भी तरह से धन कमाने में लगा है, वह चाहे कोयला चोरी...
“कहाँ गए परम्परा/रीति-रिवाज” कुछ पुरानी हो गई परम्पराएंजिन्हें आधुनिक युगनहीं मानता… अपने मनानुसार चलना हैकुछ नई रीतियाँ चलनिकलीं हैं,.. विवाह में बदलाव आयादो लोगों के मिलननये...
मैं’ का रोग जिस जिस को लगा,उस पर न दवा, न ही कोई टोटका लगा। अपने अभिमान से न जाने इसने कितनों को ठगा।वह नहीं रहा...
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