“बुझे दीप का वज़न” गाँव के पीपल तले चौपाल का दीया, रामू की पुस्तैनी विरासत था। दादा की काँपती उँगलियाँ जलाती थीं, फिर पिता की सख्त...
“बुझे दीप का वज़न” गाँव के पीपल तले चौपाल का दीया, रामू की पुस्तैनी विरासत था। दादा की काँपती उँगलियाँ जलाती थीं, फिर पिता की सख्त...
गर्मियों की छुट्टियां चल रही थी। नकुल के बालहठ के आगे हार दादा को गाँव से शहर उसके साथ रहने आना ही पड़ा। नकुल बड़ा खुश...
अनुमति हो तो फ्रंट पेज परइसी अंक में गीत छाप दें। देर रात को फोन लगानासंपादन की मजबूरी है।कितना प्यारा लिखा आपनेभाषा इसकी संतूरी है। बदले...
इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं.. जरा नजरों से कह दो जी निशाना चूक ना जाए.. छलके तेरी आँखों से शराब और जियादा.. निगाहों-निगाहों...
सुबह का सुहावना समय था,शर्मा जी पार्क से टहल कर लौट रहे थे,तभी बगल के मकान की खिड़की से किसी छोटी सी लड़की ने आवाज दीअंकल!!...
नारी माँ है भगवान का अवतार हैमेरी खुशियों का वही आधार है नारी मन कोमल नारी से संसार हैनारी बिन कुछ नही सब निराधार है नारी...
वर्तमान टूटे कंधों परबोझ ढो रहा है अतीत काहम भविष्य के लिए समर्पितनिष्ठाओं को आँक रहे हैं अर्द्धनग्न मन्तव्य उभरकरबजा रहेछज्जे पर थालीऔर किसी अज्ञात शत्रु...
ईमान बेच खाया.. तू कैसा आदमी हैकुछ शर्म कर ख़ुदाया तू कैसा आदमी है करता है मान कितना दौलत पे अपनी मूरखये तो है धूप छाया...
उदासी है, दवा है और मैं हूँ,सदा माँ की दुआ है और मैं हूँ। हुए बच्चे हैं घर से दूर जबसे,कि घर सूना पड़ा है और...
Copyright © 2026 Antra Shabd Shakti. All Rights Reserved. Powered by WebCoodee