असीम स्नेह… आज एक लंबे अंतराल के बाद खुद का खुद से मिलन हुआ; लगा कि अब कुछ समय अपने लिए निकालना बहुत जरूरी है। आज...
अपनी पुरानी किताबें और काग़ज समेट रहे थे ,कि अचानक हाथ में आ गए उनके लिखे ख़त ।जो रखे थे किसी बड़े -से लिफाफे में।खोल कर...
मेरे मन, मैं तुमसे बहुत कम बात करती हूँ,जबकि तुमसे अच्छा और हमेशा साथ रहने वाला और मुझे अचछे से समझने वाला दोस्त कोई दूसरा हो...
मृदु स्नेह! कैसी हो मेरी अंतश्चेतना? आज बरसों बाद तुम्हारे लिये वक्त निकाल पाई। जीवन के आपाधापी में दौड़ते-भागते हुए भी तुम्हारा भोला मन सदैव मेरे...
स्नेह कैसे हो? तुम पक्का मुझे कोसते होगे। क्योंकि मैं सदैव तुम्हें बोझिल रखती हूं। और कुछ न कुछ उधेड़बुन में तुम्हें घेरे रखती हूं पर...
माफ करना बहुत दिनो बाद तुमसे बात कर रही हूँ, जानती हूँ तुम मेरी प्रिय सखी हो मुझसे नाराज नहीं होगे मेरी व्यस्तता और मजबूरी को...
प्रिय नंदिता,बहुत सारा प्यार … जीवन के उतार-चढ़ाव में अपना और मन का ध्यान रखने के लिए साधुवाद है तुम्हे।नंदिता का अस्तित्व आखिर तुमने बनकर स्वय...
परम प्रिय जिंदगी, पर तुमने रखा ध्यान और मिला मुझे सुलझे विचारों वाला जीवनसाथी और जिंदगी की गाड़ी सरपट निकल पड़ी। सीखने की कोई उम्र नहीं...
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