(तुमको सिर्फ़ ग़ज़ल कह दूं तो……???) नगमो-नज़ाकत,शेरो-शरारत, कवित, रासो का क्या होगा जी?तुमको ग़ज़ल कहूँ तो बाकी, अहसासों का क्या होगा जी? सिसक रहा मकता, मौजूॅं...
दोनों समानार्थी होकर भी व्याकरण की दृष्टि से दोनों में ही अंतर है । कुशल एक विशेषण है जो किसी विशेष कार्य में व्यक्ति दक्षता की...
प्रिय अंतससस्नेह आलिंगन आज एकांत के इन कुछ पलों में, जब बाहरी दुनिया का शोर थम गया है, मैं तुम्हारे बहुत पास बैठकर बात करना चाहती...
कम से कम दुनियादारी तो निभाते रहियेताले यूंही लोगों के मुँह पर लगाते, रहिये। पैदा होते ही रिश्ते खून के जो जाते हैं बनयथासम्भव उनको टूटने...
सुनीता जब से सास बनी है, सारे रिश्तेदारों में डींग हाँकती फिर रही, मेरी बहू बिल्कुल वैसी ही है, जैसा मैंने सोचा था। असल में बेटा...
माँ तो अनपढ़ थी लेकिनदुनिया की बात बताती थीचाँद सितारे जंगल मिट्टीआँगन तक आती थीमाँ तो अनपढ़ थी लेकिन“माँ” कहना मुझे सिखाती थी “क” से कबूतर...
ये रातें… ये हवाएँ… मोगरा और आधा चाँद…अभी रात के साढ़े आठ बज रहा है।दिन भर की भागदौड़, जिम्मेदारियों और अनगिनत विचारों से भरे मन को...
मान की सम्मान की हमने नहीं परवाह की।ख़ुश रहें साथी हमारे बस इसी की चाह की। इस दिल-ए-मासूम ने हर एक को अपना कहा,ठोकरें खाई भले...
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