कभी कभी कुछ महसूस होता है,और कभी कुछ भी नहीं,कभी कुछ शब्द माध्यम बनते हैं,और कभी बनते लफ्ज भी नहीं। कभी कागज़ की कश्ती पार लगाती...
कभी कभी कुछ महसूस होता है,और कभी कुछ भी नहीं,कभी कुछ शब्द माध्यम बनते हैं,और कभी बनते लफ्ज भी नहीं। कभी कागज़ की कश्ती पार लगाती...
हम ने दुनिया के दर्द पाले हैंहम तो दर्द-ए-हयात वाले हैं चाँदनी हमसे रश्क करती हैचाँद कहता है हम निराले हैं तुम लकीरों के हो सताये...
प्यार करना तो उम्रभर मुझकोवरना शहजादे माफ़ कर मुझको बेवफ़ाई करो इजाज़त हैहोना पाए कभी ख़बर मुझको मुझसे सच बोलिए ज़रूरी नहींहै यकीन तेरे झूठ पर...
हर घड़ी नाम तेरा लेना इबादत है क्या?दिल में नफरत हो तो सजदों की जरूरत है क्या? झूठ को सच की तरह पेश जो तुम करते...
ग़ज़ल 212 212 212 212 चांद था वो सितारा नहीं हो सका।इसलिए वो हमारा नहीं हो सका। रूख से उनके परदा हटा ही नहीं,देखना फिर गॅवारा...
शहर के उस आखिरी छोर पर, जहाँ कंक्रीट के जंगल की सांसें फूलने लगती हैं, वह ‘शांति विला’ खड़ा था। विला का नाम ‘शांति’ शायद इसलिए...
दीवाल में एक आला हैआले में दीप धर दिया गया हैदीप किसी का चेहराया आँखें भी हो सकती हैंजो प्रज्ज्वलित हैं आँखों का प्रकाश फैला है...
सीने में कैदकिए समझौतेआँखों में बसेआँसुओ को छुपाचेहरे को प्रसन्नबनाने के प्रयास में, जोसभी मुश्किलों कोचुनौती दे जातीममतामयी, वो है“माँ” । पल में गिरतेआंसुओं को हमारेअपने...
हर इंसा के दो दो चेहरे,इनको मैं पहचानूं कैसे,छल प्रपंच मैं न ही जानूँ,दिन जीवन के गुजारुं कैसे।। कभी स्वेत तो कभी स्याह से,उजले काले मन...
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