“जिंदगी का फ़लसफ़ा भी अजीब होता है,जो दूर लगता है वही अपने करीब होता है। रिश्ते नाते निभाते हर कोई अजीज होता है,वक्त गवाह है कि...
अब न खाऊँ पिज्जा-बर्गर की एक भी मैं बाइट,सीमा बोली सबको सुन लो, मैं कर रही हूं डाइट। सुबह-सुबह मैंने सलाद चबाया, गाजर, खीरा, टमाटर,पर मन...
दाढ़ी रखना सरल है, पर निभाना… तपस्या है। सुबह दर्पण के सामने खड़ा मनुष्य योद्धा है।एक हाथ में कंघी, दूसरे में धैर्य। हर बाल एक प्रश्न...
“हास्य व्यंग्य” बारात निकलने का समय हो गया थानिकासी की थी तैयारी लेकिन दूल्हा कहीं नजर नही आ रहादेखा कर रहा था ब्यारी दादा ने कान...
“हास्य-व्यंग्य” 2212/2122/2212आजाद भारत में आजादी चाहिए।बर्बाद जो हैं उनको बर्बादी चाहिए।।ऐसे किसी देश के गद्दारों की?अब देश को उनकी कुर्बानी चाहिए।। -अजय पाण्डेय बेबस
“हास्य-व्यंग्य” कितने लगा लो आंवला रीठाऔर लगा लो प्याज कढ़ाई में काला कर लोऐलोविरा मैथीफुला दो सारी रात गुड़हल फूल कलोंजी मिला दोकर लो काले हाथ...
मानव मन है, मानव तन है,मानवता ही मानव जीवन है।“जियो और जीने दो” की संस्कृति में,रचा-बसा यह सारा जीवन है॥ बाल्यकाल से लेकर सम्पूर्ण जवानी,संघर्षों की...
“हास्य-व्यंग्य” आज भी जब कभी,कहीं रिश्ता पक्का होता है, लड़के की माँ का स्वभाव,देखने में कितना सच्चा होता है। पास बिठाकर, मुस्काकर,बात बड़ी मीठी करती है,...
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