“हास्य-व्यंग्य” नई पड़ोसन बड़ी जोरदार,किस्से उनके रहते मजेदार। पुरानी हीरोइन की स्टाइल मारकर,कपड़े पहनने में उन्हें मज़ा आता है। साथ में स्टाइल मारकर डायलॉग सुनाकर,दूसरों को...
“हास्य-व्यंग्य” नई पड़ोसन बड़ी जोरदार,किस्से उनके रहते मजेदार। पुरानी हीरोइन की स्टाइल मारकर,कपड़े पहनने में उन्हें मज़ा आता है। साथ में स्टाइल मारकर डायलॉग सुनाकर,दूसरों को...
अरे! मुसाफिर तू कहां जाएगा?कुछ तो पाया नहीं, क्या खोएगा?तेरा कौन है? न यहां, न वहां,तू जाएगा कहां? निकला था बहुत दिनों पहले,पीछे छोड़ के सारे...
कभी सिद्ध-सरल, सुलझी-सुलझी,कभी पतंग-डोर सी उलझी-उलझी। नैना सपनों से भरे-भरे,कोरों से अश्रु-कण झरें-झरें। होठों पर वीणा की तान सजे,यौवन से मधु की रसधार बहे। एक चंचल-चंचला...
(पति द्वारा पत्नी की अभ्यर्थना) “हास्य-व्यंग्य” जब देखो तब व्रत रखती हो, लेकिन पतली हो ना पाईं,व्रत में ऐसा क्या खाती हो, मोटी ही होती जाती...
कहाँ गई अब एकता, कहाँ गया भाईचारा विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,कहाँ गई अब एकता, कहाँ गया भाईचारा। हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई,प्रेम से रहते थे सब...
कुछ टूटे रिश्तों को याद करते हुएसोने की नाकाम कोशिश करती,मैं बचपन के ख़यालों में खो गई। बचपन से ही माँ ने सिखाया थारिश्तों को सहेजना...
वो इम्तेहान ही तो सिखाते हैं,हमें जीने का सबक दे जाते हैं। पुरुषार्थ देखकर वो,दीपक-सा जल जाते हैं। बिखेरकर अपनी रोशनी,समीर संग लड़ जाते हैं। पाने...
याद करो वो समय जबमेरे बोलने से, चहकने से, तुम परेशान हो जाते थेकितना चिढ़ जाते थेहर समय बोलती रहती हो,कभी चुप भी रहा करो,.. समयांतराल...
निवाले अपनी थाली के खिलाना जानती है माँसभी रोते हुए बच्चे हँसाना जानती है माँ तेरी ऊँची उड़ानों को मिले हैं पर इसी दम सेपिता के...
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