इसको है मझधार मुहब्बत,,उसको है पतवार मुहब्बत,,, चाहे जितनी रखो छुपाकरहो जाती अखबार मुहब्बत एहसासों के बीच पकी हैइतनी लज्जतदार मुहब्बत दुनिया जहर बताती जिसकोहै वो...
खोलकर जब भी तेरी चिट्ठी पढ़ी है मैंनेदर्द से भीगी हुयी आह भरी है मैंनें मुझसे वो बात नज़ाकत से किया करती हैउसकी तस्वीर जो बक्से...
मैं भी थकती हूं, पर कह नहीं सकतीहर सुबह जब सब सोते हैंमैं अपने ही बोझ से उठती हूँ,जिम्मेदारियों की चादर ओढ़करखुद को तैयार करती हूंटूटे...
तू तो मेरे अंदर समाहित थी कविता।मुझे तो पता न था ,पता ही न था।हिम के शिखर को ,रवि रश्मी बन चूमरही थी।निर्झरी बन ,मोतियाँ बिखेरती...
जैसे शराब के प्यालों औरसिगरेट के धुयें के बीचउलझ के रह गयी थी जैसे कभी ढूँढता उसे मय केप्यालों मेंतो कभी सिगरेटके धुएं के छल्लों मेंतलाशते-तलाशते...
प्राणवायु पर निर्भर हमारी आयुयह सत्य कैसे मैं भूल जाऊंवृक्षों से मिलती प्राणवायुयह सत्य में कैसे भूल जाऊंपरोपकार का बदला मानवक्यों उनका विनाश कर चुकाताअपने हाथों...
मौन गगन हैमौन पताका,मौन दिखी धरती वे। थल ही थल मेंजन ही जनउड़ गए बचे परती वे। बढ़ रही आबादीपूरी न होती खेत में खादीहाथ मोबाइल...
सुनो लड़कियों, ज़रा सुनोसुनो लड़कियों, ज़रा सुनो,ये वक़्त का सच्चा बयान सुनो।उड़ना है तो आकाश छुओ,पर धरती की भी पहचान सुनो।शिक्षा से ऊँचे शिखर चढ़ो,पर घर...
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