हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के.. अपनी सुविधा के लिए अंग्रेजों ने हमारे बच्चों को भी...
हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के.. अपनी सुविधा के लिए अंग्रेजों ने हमारे बच्चों को भी...
कितने परिंदे बेघर हुए, तुम क्या जानो कुल्हाड़ीहमने अपने को शहीद कर किसी के घर सजाए हैं।हमारे बदन पर जब-जब चली हैं आरियां उनकीउफ़ तक हमने...
हर मनुष्य में परमात्मा का अंश आत्मा के रूप में विद्यमान होता है। यहाँ समझने वाली बात यह है कि जब उसमें ईश्वर का अंश है...
हां मैं अटल खड़ा हूं ;एक वंश वृक्ष के जैसे।। आंधी, पानी, गर्मी जैसी,लाख मुसीबत आए,फिर भी मैं अटल खड़ा हूं,एक वंश वृक्ष जैसे।। प्रकृति की...
जिंदगी का क्या भरोसासोच सोच जिंदगी को मत सताइए भरोसा खुद पर रखिएजिंदा हो तो जिंदादिली दिखाइये ओर जब जाना होबिन बताए बिन सताएचुपचाप निकल जाइए...
जो उनको हो स्वीकार बात तो, अहसासों के गीत लिखूंलिख दूँ उनको नील कमल और अपने मन का मीत लिखूं पूर्ण चन्द्र-सा चेहरा लिख दूँ, और...
हिंसा में कोई मर गयाफिरबातें हुईमुलाकातें हुईधर्म-कर्म की सौगातें हुई फिरसदमे में मां-बाप हैंबेघर सा परिवार हैनिवाले की दरकार हैआंसुओं का पारावार हैटूटे सपनों की चीत्कार...
कितनीं फरमाईशेकितनी आजमाईशेइक स्त्री के कितनें रूपकितनें चेहरेइक भावहीन मन कितनीं भाषायें सिखताकितने अर्थ समझताकितनीं आकांक्षाये पूर्ण करताकितना अधूरा रहता मन की तार्किक कसौटी पर हर...
एकदूजे के घर पर यारों आना जाना पड़ता हैरिश्ते नाते यार यहाँ पर जिसको निभाना पड़ता हैधन दौलत है जो कुछ भी सब धरी रह जाएगीछोड़कर...
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