विद्रोह, विद्रोह, विद्रोह…कुछ नसीहतों के विरुद्ध, नहीं जी सकताखुद की खातिर,नहीं हँस सकताअपनों से मुँह मोड़कर, आखिरकैसे सहमत हो जाऊँअपने सिद्धांतों के विपरीत, यदिमेरे सिद्धांतपोषित करते...
विद्रोह, विद्रोह, विद्रोह…कुछ नसीहतों के विरुद्ध, नहीं जी सकताखुद की खातिर,नहीं हँस सकताअपनों से मुँह मोड़कर, आखिरकैसे सहमत हो जाऊँअपने सिद्धांतों के विपरीत, यदिमेरे सिद्धांतपोषित करते...
आये तुम खिल गयेआँगन में गुलमोहर पोर-पोर महक गईअमराई बहक गईशाखा से लिपट बेलइतराई लहक गई आये तुम झूम उठीउमस भरी दोपहर थिरक उठा मन सुगनासगुनों...
ख्वाब में आओ सनम अब, नींद पाना चाहती हूँ !मै मिलन की हर घडी, तुम सँग बिताना चाहती हूँ! शब्द में लिखती तुम्ही को, गीत या...
ऐसा कुछ कहने की चाह मेंजो न कहा गयामौन हूँ कई दिनों से जो है बात मन मेंवह क्या किसी की स्मृति में नहीं ?नहीं आई...
भाव कुण्डली बेरंग पड़ी है शिकायत है नजारों से,नजर में करूणा नही, पतझड़ की झलक बहारों में।हाय हाय किच किच में मिलना बिछुड़ना जारी है,हर कोई...
ग़ज़ल 122 122 122 12 सभी जानते हैं, नगीने मिले।मगर यार मुझको, हठीले मिले। मुहब्बत किया था मैं जिससे यहां,खुशी और गम सब, उसीसे मिले। मिटाकर...
मेरे पीछे-पीछे दबे पाँव अचानक कोईघर में घुसने की कोशिश में शायद अबजोर से दरवाजे की साँकल खटका रहा हैसमझ नहीं पाई वह कौन हो सकता...
“बड़े भाग्य यह मानुष तन पाया |सुर दुर्लभ सद्ग्रंथन्हि गाया ||” धनकुबेर आतुर हैं सारे,पञ्चतत्व कब्जाने को।कलि की यह राक्षसी सोच,मानव मानव को खाने को।। नहीं...
ग्लेशियर टूटकर गिर रहे हैं, बड़ा हृदय विदारक मंजर है।मलबा बह- बहकर आता है, पानी का प्रवाह भयंकर है।स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए जाते थे कभी...
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